श्रीलंका से नेपाल तक: क्रांतिकारी लहरों से हम क्या सबक ले सकते हैं?

कभी तो ऐसा लगता है कि देश में शांति है और वहाँ का शासक वर्ग सत्ता में मज़बूती से स्थापित है — लेकिन अगले ही दिन क्रांतिकारी जनता जलते हुए संसद भवन के सामने खड़ी मिलती है। पुलिस, सांसद, और प्रधानमंत्री भाग चुके होते हैं।…

भ्रष्ट राजनैतिक तंत्र को राख कर नेपाल की जनता ने पूंजीवादी शासकों को डराकर भगाया

 नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने संसद, सर्वोच्च न्यायालय, राजनैतिक दलों के अधिकारियों और वरिष्ठ राजनेताओं के घरों में आग लगा दी है। प्रधानमंत्री और कई कैबिनेट मंत्री इस्तीफ़ा दे चुके हैं। राजनेताओं को सेना उनके घरों से बचा कर बाहर ला रही है। वर्षों तक क्रूर…

गिलगित-बाल्टिस्तान के राजनीतिक बंदियों की रिहाई -AAC-GB के संघर्ष की एक ऐतिहासिक जीत

बड़ी जीत – अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की ताकत दर्जनों देशों में लगभग तीन महीने तक चले विरोध प्रदर्शनों और लाखों मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यकर्ताओं व संगठनों के समर्थन के बाद, अवामी एक्शन कमेटी गिलगित-बाल्टिस्तान (AAC-GB) के सभी राजनीतिक कैदी अब ज़मानत पर रिहा कर…

एक देश में समाजवाद : असंभव क्यों?

सर्वप्रथम, समाजवाद निरपेक्ष तौर उच्च स्तरीय उत्पादन पर आधारित होता है। समाजवाद की निम्नतन दशा पूंजीवाद की उच्चतम दशा होनी चाहिए। यदि आज विश्व में तमाम सारी समस्याएं संसाधनों के असमान वितरण के कारण है, तब इसका केवल एक मात्र हल यह कि आवश्यकता से…

भारत: बड़े लोकतंत्र का बड़ा नाटक

भारत की पंद्रहवीं लोकसभा का कार्यकाल 31 मई 2014 में पूरा हो रहा है जिसके बाद आम चुनाव का आयोजन किया जाएगा . 13 सितंबर को भारत के गुजरात राज्य के शहर अहमदाबाद में दक्षिणपंथी अतिवादी दल भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) के संसदीय…